फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं Read More »
करम के बादल बरस रहे हैं, दिलों की खेती हरी भरी है करम के बादल बरस रहे हैं, दिलों की खेती हरी भरी है Read More »
रुख़ दिन है या मेहरे समा येह भी नहीं वोह भी नहीं रुख़ दिन है या मेहरे समा येह भी नहीं वोह भी नहीं Read More »
अल्लाहुम्म स़ल्लि अ़ला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मदिन अल्लाहुम्म स़ल्लि अ़ला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मदिन Read More »